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शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू : जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और नौ दिन का कैलेंडर

ewn24 news choice of himachal 10 Oct,2026 2:57 pm


    आस्था, भक्ति और शक्ति का महापर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू होने जा रहा है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ ही पूरे देश में नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घर-घर और पूजा पंडालों में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाएगी।

    🔔 घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त


    धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार, घटस्थापना सदैव शुभ मुहूर्त में ही की जानी चाहिए। इस वर्ष भक्तों को घटस्थापना के लिए सुबह और दोपहर दोनों समय अत्यंत शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं:

    मुहूर्त का प्रकार समय (11 अक्टूबर) महत्व / विवरण


    प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक घटस्थापना के लिए सबसे उत्तम समय (अवधि: ~3 घंटे 52 मिनट)
    अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक यदि सुबह स्थापना न हो पाए, तो इस मुहूर्त में करना अत्यंत फलदायी

    ध्यान रखें (राहुकाल) : घटस्थापना या कोई भी शुभ कार्य राहुकाल के दौरान वर्जित होता है। 11 अक्टूबर को शाम 04:34 बजे से शाम 06:01 बजे तक राहुकाल रहेगा, इसलिए इस समय पूजा की शुरुआत न करें।

    🐘 माँ दुर्गा का आगमन और वाहन संकेत


    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस शारदीय नवरात्रि माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर पधार रही हैं। देवी का हाथी पर आगमन अत्यंत शुभ माना जाता है, जो सुख-समृद्धि, देश में शांति, अच्छी वर्षा और धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक है।

    📅 शारदीय नवरात्रि 2026: 9 दिनों का पूरा कैलेंडर


    इस बार नवरात्रि की तिथियों के क्रम में विशेष संयोग बन रहा है, जिसके कारण नौ दिनों का पर्व तालिका इस प्रकार रहेगी:

    11 अक्टूबर (प्रतिपदा): घटस्थापना एवं माँ शैलपुत्री पूजा

    12 अक्टूबर (द्वितीया): माँ ब्रह्मचारिणी पूजा

    13 अक्टूबर (तृतीया): माँ चंद्रघंटा पूजा

    14 अक्टूबर (चतुर्थी): माँ कूष्मांडा पूजा

    15 अक्टूबर (पंचमी): माँ स्कंदमाता पूजा

    16 अक्टूबर (षष्ठी): माँ कात्यायनी पूजा

    17 व 18 अक्टूबर (सप्तमी): माँ कालरात्रि पूजा (सप्तमी तिथि विस्तार)

    19 अक्टूबर (अष्टमी व नवमी): माँ महागौरी एवं माँ सिद्धिदात्री पूजा (कन्या पूजन)

    20 अक्टूबर (दशमी): विजयादशमी (दशहरा) एवं नवरात्रि पारण

    🪔 घटस्थापना की सरल पूजा-विधि


    स्थान शुद्धि: पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल छिड़कें और लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।

    कलश तैयारी: मिट्टी/तांबे के कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, एक सिक्का, अक्षत और दूर्वा डालें।

    पल्लव व नारियल: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर स्थापित करें।

    जौ बोना: मिट्टी के बर्तन में साफ़ मिट्टी और जौ मिलाकर रखें, जिसे घट के नीचे स्थापित किया जाता है।

    संकल्प एवं आरती: माँ शैलपुत्री का ध्यान करते हुए धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें तथा व्रत व पूजा का संकल्प लें।


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